आ जाते हैं लोग हमको समझाने,
सब समझते हैं हमको दीवाने,
गर मिल जाता सुकून महफिल में,
यूँ जाते ना लोग मैखाने में....
#SwetaBarnwal
सब समझते हैं हमको दीवाने,
गर मिल जाता सुकून महफिल में,
यूँ जाते ना लोग मैखाने में....
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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