Friday, 8 December 2017

सारी उम्र गुज़ार दी तुने मुझे परखने में,
काश...! थोड़ा तो वक्त दिया होता मुझे समझने में...।

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...