Sunday, 10 December 2017

बेटियाँ...

बेटियाँ....,

इन्हे जीने का अधिकार दो,
थोड़ा सा इनको प्यार दो... 

दो शिक्षा का अधिकार इनको,
अहसास दो अपनेपन का इनको... 

मान दो, सम्मान दो इनको,
आगे बढ़ने का अधिकार दो इनको...

माना ये वंश बेल को नहीं बढ़ाएगी, 
पर इनके बिना वंश बेल मर जाएगा... 


#SwetaBarnwal

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...