Wednesday, 27 December 2017

तारीफ़ करते हैं सभी मेरे लफ़्ज़ों की लेकिन, 
कोई मेरे अल्फाज़ों की सिसकियाँ नही सुनता...

#SwetaBarnwal 

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...