थक गई हूँ मै चलते-चलते ऐ ज़िन्दगी,
थोड़ी देर तेरी आगोश में सुस्ताना चाहती हूं... ।
बहुत बहा लिए आँसू मैंने किसी की याद में,
अब थोड़ी देर के लिये मुस्कुराना चाहती हूं ...। ।
कहाँ से चली थी मै कहाँ को पहुंच गई,
मंज़िल की चाह मे रास्ते से भटक गयी मैं... ।
अब नहीं कोई और है हसरत मेरी,
दो पल चैन से मैं गुनगुनाना चाहती हूं... ।।
कभी चाहा था किसी को बे-इन्तेहाँ,
एक बार फिर उसी से नज़रें मिलाना चाहती हूं...।
ज़लील हुई थी जहां मेरी मोहब्बत,
एक बार फिर उसी के दर पे जाना चाहती हूं...। ।
बहुत खाई है ठोकरें #श्वेता ने फूलों से,
एक बार पत्थरों को भी आज़माना चाहती हूं...।
अपने बनकर कई दगा दे गए हमे,
एक बार गैरों से भी दिल लगाना चाहती हूं...। ।
जीते जी जो पूरी हो ना सकी हसरत हमारी,
अब मर कर उसे पूरा कर जाना चाहती हूं...।
#SwetaBarnwal
थोड़ी देर तेरी आगोश में सुस्ताना चाहती हूं... ।
बहुत बहा लिए आँसू मैंने किसी की याद में,
अब थोड़ी देर के लिये मुस्कुराना चाहती हूं ...। ।
कहाँ से चली थी मै कहाँ को पहुंच गई,
मंज़िल की चाह मे रास्ते से भटक गयी मैं... ।
अब नहीं कोई और है हसरत मेरी,
दो पल चैन से मैं गुनगुनाना चाहती हूं... ।।
कभी चाहा था किसी को बे-इन्तेहाँ,
एक बार फिर उसी से नज़रें मिलाना चाहती हूं...।
ज़लील हुई थी जहां मेरी मोहब्बत,
एक बार फिर उसी के दर पे जाना चाहती हूं...। ।
बहुत खाई है ठोकरें #श्वेता ने फूलों से,
एक बार पत्थरों को भी आज़माना चाहती हूं...।
अपने बनकर कई दगा दे गए हमे,
एक बार गैरों से भी दिल लगाना चाहती हूं...। ।
जीते जी जो पूरी हो ना सकी हसरत हमारी,
अब मर कर उसे पूरा कर जाना चाहती हूं...।
ज़िन्दगी तो कभी मुकम्मल हुई नहीं हमारी,
बस मौत मैं अपनी #शायराना चाहती हूं...।
#SwetaBarnwal
2 comments:
Very nice lines.... Prakash ji ki dil ki bate ap likh rhi ho... Kya bat he....
Prakash ji Ye lines apko apni lg rhi he na
Wow ...superb
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