Wednesday, 6 December 2017

मौत मैं अपनी #शायराना चाहती हूं...।

थक गई हूँ मै चलते-चलते ऐ ज़िन्दगी,
थोड़ी देर तेरी आगोश में सुस्ताना चाहती हूं... ।
बहुत बहा लिए आँसू मैंने किसी की याद में,
अब थोड़ी देर के लिये मुस्कुराना चाहती हूं ...। ।

कहाँ से चली थी मै कहाँ को पहुंच गई,
मंज़िल की चाह मे रास्ते से भटक गयी मैं... ।
अब नहीं कोई और है हसरत मेरी,
दो पल चैन से मैं गुनगुनाना चाहती हूं... ।।

कभी चाहा था किसी को बे-इन्तेहाँ,
एक बार फिर उसी से नज़रें मिलाना चाहती हूं...। 
ज़लील हुई थी जहां मेरी मोहब्बत,
एक बार फिर उसी के दर पे जाना चाहती हूं...। ।

बहुत खाई है ठोकरें #श्वेता ने फूलों से,
एक बार पत्थरों को भी आज़माना चाहती हूं...।
अपने बनकर कई दगा दे गए हमे,
एक बार गैरों से भी दिल लगाना चाहती हूं...। ।

जीते जी जो पूरी हो ना सकी हसरत हमारी,
अब मर कर उसे पूरा कर जाना चाहती हूं...।
ज़िन्दगी तो कभी मुकम्मल हुई नहीं हमारी,
बस मौत मैं अपनी #शायराना चाहती हूं...।

#SwetaBarnwal

2 comments:

Unknown said...

Very nice lines.... Prakash ji ki dil ki bate ap likh rhi ho... Kya bat he....
Prakash ji Ye lines apko apni lg rhi he na

Unknown said...

Wow ...superb

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...