Friday, 8 December 2017

माँ...! तुम बहुत याद आती हो... ।😢

माँ...! तुम बहुत याद आती हो... ।

जब सुबह - सुबह उठ के खुद से रेस लगाती हूँ,
चंद लम्हों में ही सब कुछ समेटने की कोशिश करती हुँ,
वक्त को पिछे करने की चाह मे जब खुद पिछे रह जाती हुँ
तब, हाँ,,,  माँ...! तुम बहुत याद आती हो... ।

हर रोज सुबह उठती हूँ मैं अब बिना तेरी डांट सुने,
अब तरस गये हैं कान सुनने को, 
जब बाबा कहते थे,  अरे सोने दो पांच मिनट, 
अब अलार्म की घंटी ही माँ और बाबा हो गये हैं। 
कभी लगता है सब छोड़ सो जांऊ कुछ देर और, 
तब, हाँ,,,  माँ...! तुम बहुत याद आती हो... ।

जब कभी खाने का स्वाद बिगड़ जाता है,
और सबकी पैनी नज़र मुझपे आ कर टिकती है,
गलत ना हो कर भी जब गुनहगार बन जाती हुंँ,
तब, हाँ,,,  माँ...! तुम बहुत याद आती हो... ।

सास, ससुर, ननद, देवर, पति और बच्चों
सबको खुश रखने मे हर बार खुद को तकलीफ देती हुँ,
फिर सबके होठों पे प्यार के दो मीठे बोल नही देखती,
तब, हाँ,,, माँ...! तुम बहुत याद आती हो... ।

एक कुशल गृहिणी और कामकाजी महिला के बीच
#श्वेता जब खुद को अक्सर तलाशा करती है, 
सब कुछ पाने की कोशिश में जब सब कुछ छुटता है,
तब, हाँ,,, माँ...! तुम बहुत याद आती हो... ।

पूरे दिन की भाग दौड़ और सबकी जरूरतों को पूरा कर,
जब देर रात खुद को बिस्तर तक घसीटती हुँ,
और नींद के आगोश में जब अगले दिन की रूपरेखा बनाती हुँ,
तब, हाँ,,,  माँ...! तुम बहुत याद आती हो... ।

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...