आज हिमालय की चोटी से
फिर दुश्मन ने ललकारा है,
भारत माँ के वीर सपूतों,
तुम्हें उनको धूल चटाना है...
कश्मीर की जो मांग करेगा,
वह अब मुह की खाएगा,
हिंदुस्तान को batne वाला,
Ab ख़ुद बोटी-बोटी कट जायेगा...
नहीं वक़्त अब सोने का,
तुझे तूफां बन अब चलना है,
देश के अंदर छुपे गद्दारों पे,
मौत बन अब तुझे गिरना है...
फिर दुश्मन ने ललकारा है,
भारत माँ के वीर सपूतों,
तुम्हें उनको धूल चटाना है...
कश्मीर की जो मांग करेगा,
वह अब मुह की खाएगा,
हिंदुस्तान को batne वाला,
Ab ख़ुद बोटी-बोटी कट जायेगा...
नहीं वक़्त अब सोने का,
तुझे तूफां बन अब चलना है,
देश के अंदर छुपे गद्दारों पे,
मौत बन अब तुझे गिरना है...
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