नन्ही नींद सो जाती है,
ओढ़ के माँ का आँचल,
माँ तो तब सो पाती है
जब नन्ही नींद उढा दे चादर.... ।
#SwetaBarnwal
ओढ़ के माँ का आँचल,
माँ तो तब सो पाती है
जब नन्ही नींद उढा दे चादर.... ।
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
No comments:
Post a Comment