Wednesday, 27 December 2017

कविता

ये कविता है जो लिखी नहीं जाती है, 
बस दिल से उतर कर शब्दों मे बदल जाती है,
ये अहसासों से पनपती है 
और अल्फाज़ों के खज़ानों से उभरती है,
इसका कोई रंग-रूप नहीं होता है, 
ना कोई मुकम्मल स्वरूप होता है, 
ये गमों में उभरती है, 
तो खुशियों में निखरती है,
कविता ना तेरी होती है और ना मेरी,
ना ही ये स्वार्थी होती है,
ये गैरों के दर्द में बरसती है,
तो दूसरों की आशिकी में भी चमकती है,
झांकती है सबके दिलों में ये,
थोड़ी सी चंचल तो थोड़ी नादान है ये,
जिसकी कलम हो ये उसी की नहीं होती है, 
ये वो जादु है जो हर दिल से गुज़रती है, 
छु जाती है ये कइयों के दिल को, 
कह जाती है ये कइयों के अनकहे जज़्बातों को,
ये हर कोई लिख ले मुमकिन नहीं, 
हर कोई इसे समझ पाए आसान नहीं, 
ये वो हुनर है जो सिखाई नहीं जा सकती है, 
ये कोई हुक़ुमत नहीं जिसपे किसी का हक़ हो,
ये अहसासों का मेल है, शब्दों का खेल है, 
जो दिल से निकलती है और कागज पे बिखर जाती है...
ये कविता है जो लिखी नहीं जाती है, 
बस दिल से उतर कर शब्दों मे बदल जाती है...

#SwetaBarnwal

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