कहाँ तक जाना है, ये कौन जानता है...
क्या खोना और क्या पाना है, ये कौन जानता है...
किस मोड़ पे कौन मिल जाए, ये कौन जानता है...
कब कौन बिछड़ जाए, ये कौन जानता है...
कब ज़िन्दगी महक उठे, ये कौन जानता है...
कब लहूलुहान हो उठे ज़िन्दगी, कौन जानता है...
मिलों तक का सफर साथ तय करने का इरादा लिए,
कब दुनिया छोड़ जाए, ये कौन जानता है...
कब कामयाबी तेरे कदम चूमे, ये कौन जानता है...
अगले ही पल कब ठोकरें खाओ, ये कौन जानता है...
लाखों - करोड़ों के दिलों मे बसने वाला,
कब गुमनामी के अंधेरे मे खो जाए, ये कौन जानता है...
हर वक़्त अपने अहं मे दूसरों को नीचा दिखाने वाले,
अगले ही पल क्या होगा, ये कौन जानता है...
कट जाएगी ये ज़िंदगी इसी कश्मकश में,
तन छोड़ आत्मा कब निकल जाएगी, ये कौन जानता है....
#SwetaBarnwal
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